जीएसटी पोर्टल पर बढ़ती कंप्लेंट को देखते हुए सरकार ने अब एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाया है, जो जीएसटी पोर्टल पर हेल्पडेस्क की जगह की जगह लेगा। जीएसटीएन ने एक कंप्लेंट सेल बनाई है, जहां पर जीएसटी से संबंधित सभी शिकायतों को दूर किया जाएगा। नए सिस्टम के बाद कारोबारियों की प्रॉब्लम का सॉल्यूशन कम समय में किया जाएगा।
बढ़ रहीं थी जीएसटी पोर्टल पर शिकायतें
जीएसटी पोर्टल के अधिकारी ने बताया कि वेबसाइट पर शिकायत करने के तरीके को बेहतर किया गया है। अभी तक हेल्पडेस्क के लिए ई-मेल आईडी बनाया हुआ था जिस पर सारी शिकायतें आ रही थी। शिकायतों का फ्लो बढ़ने के कारण जीएसटी पोर्टल पर ही कंप्लेंट सिस्टम को बेहतर किया गया है। अभी कारोबारी और ट्रेडर्स सीधे जीएसटी पोर्टल की वेबसाइट पर शिकायत कर सकते हैं।
पहले बना था हेल्पडेस्क
अभी तक किसी भी समस्या के लिए हेल्पडेस्क बना हुआ था जहां ट्रेडर्स और कारोबारी शिकायत कर सकते थे। पर ई-मेल करने का ऑप्शन था लेकिन अब ई-मेल बंद कर दिया गया है। इसके बदले नया शिकायत सिस्टम शुरू किया गया है। ट्रेडर्स भी कर रहे थे शिकायत
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पोर्टल पर कई टेक्निकल और फाइलिंग संबंधित दिक्कतें आ रही हैं। ट्रेडर्स ई-मेल के जरिए भी शिकायतें कर रहे थे लेकिन उसका बहुत जल्द निपटान नहीं हो रहा था। कई बार ट्रेडर्स सही तरीके से ई-मेल ड्राफ्ट भी नहीं कर पाते थे, तो उनकी समस्या ठीक ही नहीं हो पा रही थी जिसके कारण शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही थी।
ऐसे करनी होगी शिकायत
शिकायत करने के लिए ट्रेडर्स और कारोबारी को जीएसटी की पोर्टल पर जाना होगा। पोर्टल पर सर्विस पर क्लिक कर यूजर सर्विस पर जाना होगा और फिर कंप्लेंट पर क्लिक करना होगा। वहां आपकी शिकायतों के ऑप्शन आएंगे कि आप किस तरह की समस्या फेस कर रहे हैं। अपनी शिकायत पर क्लिक करके फॉर्म भरना होगा। फॉर्म को सबमिट करना होगा जिसके बाद आपको कंप्लेंट नंबर मिल जाएगा। उसके बाद आपकी शिकायत पर काम किया जाएगा। अभी तक ये लिंक एक्टिव नहीं था जिसे हाल में ही एक्टिव किया गया है।
बढ़ रहीं थी जीएसटी पोर्टल पर शिकायतें
जीएसटी पोर्टल के अधिकारी ने बताया कि वेबसाइट पर शिकायत करने के तरीके को बेहतर किया गया है। अभी तक हेल्पडेस्क के लिए ई-मेल आईडी बनाया हुआ था जिस पर सारी शिकायतें आ रही थी। शिकायतों का फ्लो बढ़ने के कारण जीएसटी पोर्टल पर ही कंप्लेंट सिस्टम को बेहतर किया गया है। अभी कारोबारी और ट्रेडर्स सीधे जीएसटी पोर्टल की वेबसाइट पर शिकायत कर सकते हैं।
पहले बना था हेल्पडेस्क
अभी तक किसी भी समस्या के लिए हेल्पडेस्क बना हुआ था जहां ट्रेडर्स और कारोबारी शिकायत कर सकते थे। पर ई-मेल करने का ऑप्शन था लेकिन अब ई-मेल बंद कर दिया गया है। इसके बदले नया शिकायत सिस्टम शुरू किया गया है। ट्रेडर्स भी कर रहे थे शिकायत
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पोर्टल पर कई टेक्निकल और फाइलिंग संबंधित दिक्कतें आ रही हैं। ट्रेडर्स ई-मेल के जरिए भी शिकायतें कर रहे थे लेकिन उसका बहुत जल्द निपटान नहीं हो रहा था। कई बार ट्रेडर्स सही तरीके से ई-मेल ड्राफ्ट भी नहीं कर पाते थे, तो उनकी समस्या ठीक ही नहीं हो पा रही थी जिसके कारण शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही थी।
ऐसे करनी होगी शिकायत
शिकायत करने के लिए ट्रेडर्स और कारोबारी को जीएसटी की पोर्टल पर जाना होगा। पोर्टल पर सर्विस पर क्लिक कर यूजर सर्विस पर जाना होगा और फिर कंप्लेंट पर क्लिक करना होगा। वहां आपकी शिकायतों के ऑप्शन आएंगे कि आप किस तरह की समस्या फेस कर रहे हैं। अपनी शिकायत पर क्लिक करके फॉर्म भरना होगा। फॉर्म को सबमिट करना होगा जिसके बाद आपको कंप्लेंट नंबर मिल जाएगा। उसके बाद आपकी शिकायत पर काम किया जाएगा। अभी तक ये लिंक एक्टिव नहीं था जिसे हाल में ही एक्टिव किया गया है।
सरकार उपभोक्ताओं के हक में ऐसा उपाय करने जा रही है जिससे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की कंपोजीशन (एकमुश्त कर) योजना के तहत पंजीकृत विक्रेता अपने ग्राहक से माल या सेवा पर टैक्स नहीं ले सकेंगे.
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाला राजस्व विभाग इसके लिए ऐसी इकाइयों को बिल पर अपने जीएसटी पंजीकरण की स्थिति को अंकित करना अनिवार्य करने की योजना तैयार कर रहा है ताकि वे खरीददार से टैक्स न ले सकें.
एक अधिकारी ने कहा कि अभी एकमुश्त योजना में पंजीकृत बहुत सी छोटी इकाइयां ग्राहकों से टैक्स तो वसूल लेती हैं पर उसे सरकार के खजाने में जमा नहीं कराती. अधिकारी के अनुसार बाजार में अभी यह गड़बड़ी खूब चल रही है. पर इस उपाय को लागू किए जाने से इस पर रोक लगेगी.
अधिकारी ने बताया कि राजस्व विभाग इस बात का प्रचार कराने की योजना भी बना रहा है कि कंपोजीशन योजना का लाभ ले रही इकाइयां ग्राहकों से जीएसटी नहीं वसूल सकती. इस योजना के तहत छोटे व्यापारियों और विनिर्माताओं को माल की बिक्री पर एक फीसदी की दर से जीएसटी जमा कराना होता है जबकि उत्पादों पर जीएसटी की सामान्य दरें 5, 12 या 18 फीसदी हैं. पर उन्हें ग्राहक से जीएसटी काटने का अधिकार नहीं है.
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाला राजस्व विभाग इसके लिए ऐसी इकाइयों को बिल पर अपने जीएसटी पंजीकरण की स्थिति को अंकित करना अनिवार्य करने की योजना तैयार कर रहा है ताकि वे खरीददार से टैक्स न ले सकें.
एक अधिकारी ने कहा कि अभी एकमुश्त योजना में पंजीकृत बहुत सी छोटी इकाइयां ग्राहकों से टैक्स तो वसूल लेती हैं पर उसे सरकार के खजाने में जमा नहीं कराती. अधिकारी के अनुसार बाजार में अभी यह गड़बड़ी खूब चल रही है. पर इस उपाय को लागू किए जाने से इस पर रोक लगेगी.
अधिकारी ने बताया कि राजस्व विभाग इस बात का प्रचार कराने की योजना भी बना रहा है कि कंपोजीशन योजना का लाभ ले रही इकाइयां ग्राहकों से जीएसटी नहीं वसूल सकती. इस योजना के तहत छोटे व्यापारियों और विनिर्माताओं को माल की बिक्री पर एक फीसदी की दर से जीएसटी जमा कराना होता है जबकि उत्पादों पर जीएसटी की सामान्य दरें 5, 12 या 18 फीसदी हैं. पर उन्हें ग्राहक से जीएसटी काटने का अधिकार नहीं है.
रोजमर्रा इस्तेमाल की 40 चीजों पर जीएसटी मे कमी:-
जीएसटी काउंसिल की 21वीं बैठक में रोजमर्रा इस्तेमाल की 40 चीजों पर जीएसटी रेट कम करने का फैसला किया है। इसके अलावा छोटी कारों पर जीएसटी दरों को लेकर जीएसटी काउंसिल ने कोई बदलाव नहीं किया है। इस फैसले से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की बात कही जा रही है।
रबड़ बैंड, झाड़ू, सूखी इमली, रेनकोट, कस्टर्ड पाउडर और अगरबत्ती सहित 40 दैनिक उपभोग की चीजों पर जीएसटी दरें कम करने का फैसला किया गया है।
जीएसटी काउंसिल ने छोटी कार खरीदने वालों को भी राहत दी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया छोटी कारों के सेस में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जबकि पहले माना जा रहा था इन कारों पर लगने वाले सेस में इजाफा हो सकता है।
जेटली ने कहा कि पेट्रोल और डीजल से चलने वाली छोटी कारें जीएसटी लागू होने के बाद तीन फीसद सस्ती हुई हैं और इन्हें लेकर अभी कोई बदलाव नहीं होगा।
हालांकि जीएसटी काउंसिल ने तय किया है कि मिड साइज कारों के सेस में 2 पर्सेंट का इजाफा होगा। वहीं बड़ी कारों पर सेस 5 पर्सेंट बढ़ाया गया है। इसके अलावा एसयूवी पर 7 पर्सेंट सेस बढ़ाया गया है, जबकि 13 सीटर वीइकल पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
जीएसटी काउंसिल की 21वीं बैठक में रोजमर्रा इस्तेमाल की 40 चीजों पर जीएसटी रेट कम करने का फैसला किया है। इसके अलावा छोटी कारों पर जीएसटी दरों को लेकर जीएसटी काउंसिल ने कोई बदलाव नहीं किया है। इस फैसले से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की बात कही जा रही है।
रबड़ बैंड, झाड़ू, सूखी इमली, रेनकोट, कस्टर्ड पाउडर और अगरबत्ती सहित 40 दैनिक उपभोग की चीजों पर जीएसटी दरें कम करने का फैसला किया गया है।
जीएसटी काउंसिल ने छोटी कार खरीदने वालों को भी राहत दी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया छोटी कारों के सेस में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जबकि पहले माना जा रहा था इन कारों पर लगने वाले सेस में इजाफा हो सकता है।
जेटली ने कहा कि पेट्रोल और डीजल से चलने वाली छोटी कारें जीएसटी लागू होने के बाद तीन फीसद सस्ती हुई हैं और इन्हें लेकर अभी कोई बदलाव नहीं होगा।
हालांकि जीएसटी काउंसिल ने तय किया है कि मिड साइज कारों के सेस में 2 पर्सेंट का इजाफा होगा। वहीं बड़ी कारों पर सेस 5 पर्सेंट बढ़ाया गया है। इसके अलावा एसयूवी पर 7 पर्सेंट सेस बढ़ाया गया है, जबकि 13 सीटर वीइकल पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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